Tuesday, 18 February 2014

........बड़ी कशमकश में हूँ....बच्चो को क्या तालीम दूँ.........!
मुझे सिखाया गया था कुछ और ...मेरे काम आया कुछ और....!!


"सोती रात ऊंघते हुए याद दिलाती है.
 सुबह फिर निकालना है टोकरी भर उम्मीद ले कर खुद को बेचने को."

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