चलो करें सकरात की बात
लोहड़ी की आग में छोले सकने की बात
रेवाड़ी और मूंगफली के अर्दय की बात
सुंदर मुन्देरिये हो की ताल
तेरा कौन विचारा की बात
शेहेर से पतंग लेने जाने की बात
मंजे को नापती उँगलियों और तान को तोलने की बात
रात को लोहरी की आग में तन बाँधने की बात
कल किस के घर से पतंग उड़ानी है वो बात
सुबह के पहले गाने की बात
आधी रात से ही तय्यारी की बात
मंगल दारा गिलास दारा और आंखाल
किसी की कांख छोटी किसीकी कांख में बल
सद्दे और मंजे के गट्टे
चर्खियों के सही से भरने की बात
दाल की पकोडियों के बीच पतंग की तान
फीनियों के बीच गुच्छे की आफत सुलझाने की बात
एक हाथ में चरखी और दूसरी से पतंग की डोर
कहीं पे पतंग निगाहें कहीं और
पतंगों के बीच पेच लड़ने की बात
वो काटा वो मारा के आवाज़
लाउड स्पीकर के गानों की बात
कटी उंगलियाँ और मांझे की धार
वो छतों पे लड़कियों की बहार
थक कर चूर होने तक पतंग उड़ाने का चाह
लालटेन से सकरात पूरी करने की बात
इस परदेस में याद कर नम होती आँखों की बात
आओ करें सकरात की बात
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